सोमवती अमावस्या का महत्त्व पूजा विधि और इसके पीछे की कथा

सोमवती अमावस्या का महत्त्व: एक साल में भगवान शिव को समर्पित सोमवती अमावस्या 2 से 3 बार पड़ती है| आइये जानते हैं, क्यों करते हैं यह व्रत? क्या है इसका महत्त्व और इसके पीछे की कथा?

इस बार की सोमवती अमावस्या

इस बार मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 14 दिसंबर (सोमवार) को रात्रि 9 बजकर 47 मिनट तक रहेगी|

सोमवती अमावस्या का व्रत

सोमवती अमावस्या का व्रत विवाहित स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु के लिए करती हैं|

सुहागिनें इस दिन व्रत रखकर पीपल के वृक्ष की पूजा करती हैं, और उसके चारों ओर 108 धागा लपेटकर परिक्रमा करती हैं|

सोमवती अमावस्या की कथा  

सोमवती अमावस्या का महत्त्व और मान्यता को बतातीं वैसे तो कई कथाएं प्रचलित हैं, उनमें से एक प्रसिद्ध है, गरीब ब्राह्मण परिवार की कथा|

उनके परिवार में एक कन्या थी, जो कि बहुत ही प्रतिभावान एवं सर्वगुण संपन्न थी|

जब वह विवाह योग्य हुई तो ब्राह्मण ने उसके लिए वर खोजना शुरू कर दिया| योग्य वर तो बहुत मिले लेकिन मिले परन्तु गरीबी के कारण विवाह की बात नहीं बन रही थी|

एक दिन ब्राह्मण के घर एक साधु महाराज जी पधारे, कन्या के आदर सत्कार से साधु बहुत प्रसन्न हुए, और दीर्घायु होने का आशर्वाद दिया|

ब्राह्मण के पूंछने पर साधु ने कन्या की शादी में अड़चन का समाधान बताते हुए इसका उपाय बताया, कि पड़ोस के गांव में सोना नामक धोबिन का परिवार है| यदि कन्या उसकी सेवा करके उससे उसका सुहाग मांग ले तो उसके विवाह की रूकावट दूर हो जाएगी|

उसके अगले ही दिन से रोज सुबह उठकर कन्या धोबिन के घर का सारा काम कर आती थी|

धोबिन ने एक दिन अपनी बहु से कहा, कि तू कितनी अच्छी है, कि सुबह उठकर घर का सारा काम कर लेती है| तब बहु ने हैरान होकर कहा, कि वह तो सोती ही रहती है,  इस पर दोनों हैरान हुई कि आखिर कौन सारा काम कर जाता है|

फिर दोनों अगले दिन सुबह की प्रतीक्षा करने लगी| तभी उन्होंने देखा. कि एक कन्या आकर काम करने लगती है| धोबिन के पूछने पर कन्या ने अपनी व्यथा उस सोना धोबिन को बताई तो धोबिन उसकी बात सुनकर अपना सुहाग देने के लिए तैयार हो गई|

सोमवती अमावस्या का शुभ दिन

अगले दिन सोमवती अमावस्या थी, सोना धोबिन को इस बात का पता था, कि सुहाग देने पर उसके पति की मृत्यु हो जाएगी|

इस की परवाह किये बिना सोना व्रत करके कन्या के घर गई, और अपना सिंदूर कन्या की मांग में लगा दिया| वहीं, दूसरी तरफ धोबिन के पति का देहांत हो गया|

रास्ते में लौटते समय पीपल के वृक्ष की पूजा अर्चना की तथा 108 बार परिक्रमा किया| जब वे घर लौटी तो देखा, कि उसका पति जीवित हो गया है| इसके लिए उसने ईश्वर को कोटि- कोटि धन्यवाद दिया|

तब से यह मान्यता चली आ रही है, कि सोमवती अमावस्या को पीपल के वृक्ष की पूजा करने से सुहाग की उम्र लंबी होती है|

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