सेक्स वर्कर की इन बुनियादी सुविधाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दिए आदेश

इस कोरोना महामारी की वजह से लगे देशव्यापी लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर सेक्स वर्कर पर ही पड़ा है। दिल्ली और देश के अन्य महानगरों की कई सेक्स वर्कर लॉकडाउन के कारण घर चलाने तक को लाचार हो गई थीं।

सेक्स वर्करों की रोजी रोटी की बुनियादी समस्यायों को देखते हुए पिछले कल सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। एक याचिका की सुनवाई के बाद कोर्ट ने तत्काल केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को इन सेक्स वर्कर को आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को यह भी साफ़ निर्देश दिया है, कि सेक्स वर्करों को राशन कार्ड के बिना राशन और आवश्यक वस्तुएं मुहैया कराई जाएं। जस्टिस एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि सेक्स वर्करों को तुरंत प्रभाव से राहत देने के लिए ऐसे कदम उठाने आवश्यक हैं, इसके साथ ही यह सुनवाई अब अगले हफ्ते के लिए टाल दी गई।

आपको बता दें कि लॉक डाउन में ट्रांसजेंडर समुदाय ने भी अपनी समस्याएं सरकार को बता कर भत्ते की मांग की थी, जिसे केंद्र सरकार ने स्वीकार करते हुए मई माह में हर ट्रांसजेंडर को 1500 रुपए महीना गुजारा भत्ता दिया था|

 कोरोना वायरस का सीधे तौर पर असर इस समुदाय पर ही पड़ा है। और ऊपर से इस भयावह बीमारी के माहौल में वैसे भी ग्राहक नहीं मिल रहे जिसका सीधा असर हर बड़े शहर की यौनकर्मियों पर पड़ रहा है।

देशभर के यौनकर्मियों के ऊपर नजर रखने वाली संस्था “ऑल इंडिया नेटवर्क ऑफ सेक्स वर्कर्स (एआईएनएसब्लयू) की राष्ट्रीय अध्यक्ष कुसुम ने कहा कि इस कोरोना महामारी से पैदा हुए संकट के चलते अकेले दिल्ली की 60 फीसदी से ज्यादा सेक्स वर्कर इस भुखमरी भरे हालत में अपने गृह राज्यों के लिए निकल चुकी हैं। जो अभी भी रुकी हुई है उनके लिए जीवन यापन की चुनौती सामने खड़ी है|

तो वहीं दूसरी ओर सेक्स वर्कर्स ने भी कोर्ट के इस निर्णय पर अपनी खुसी व्यक्त की है|

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