राकेश टिकैत: दिल्ली पुलिस में नौकरी से लेकर 44 बार जेल जाने का सफर

आजकल किसान आंदोलन के साथ एक नाम जो सबसे ज्यादा चर्चा में हैं, वो है राकेश टिकैत जो कहते आ रहे हैं, कि वह आत्महत्या कर लेंगे लेकिन आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे|

बता दें, कि राकेश को किसान सियासत अपने पिता और  किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत से विरासत में मिली है|

किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत

पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के बाद महेंद्र सिंह टिकैत देश में सबसे बड़े किसान नेता थे| महेंद्र सिंह टिकैत भारतीय किसान यूनियन के लंबे समय तक राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे, और उन्होंने कई बार केंद्र और राज्य की सरकारों को अपनी मांगों के आगे झुकने को मजबूर किया|  

बड़े भाई चौधरी नरेश टिकैत

महेंद्र सिंह टिकैत के बड़े बेटे नरेश भारतीय किसान यूनियन में ही सक्रिय थे, लेकिन राकेश दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टर के तौर पर 1985 में भर्ती हो गए थे|

लेकिन, इसी दौरान जब 90 के दशक में दिल्ली के लाल किले पर  महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में किसानों का आंदोलन चल रहा था, तब ऐसे में सरकार की ओर से राकेश पर अपने पिता महेंद्र सिंह टिकैत से आंदोलन खत्म कराने का दबाव बनाया जाने लगा|

तभी उसी समय राकेश  ने पुलिस की नौकरी छोड़ किसानों के साथ खड़े होने का निर्णय लिया|

महेंद्र सिंह टिकैत के 15 मई 2011 को लंबी बीमारी से निधन के बाद बड़े बेटे चौधरी नरेश टिकैत को पगड़ी पहनाकर भारतीय किसान यूनियन का अध्यक्ष बनाया गया तो वहीं राकेश ने राष्ट्रीय प्रवक्ता पद की जिम्मेदारी संभाल ली|

44 बार जेल गए राकेश

राकेश टिकैत किसानों की लड़ाई के चलते 44 बार जेल जा चुके हैं| एक समय  मध्यप्रदेश भूमि अधिग्रहण कानून के खिलाफ उनको 39 दिन तक जेल में रहना पड़ा था|

किसानों के हित में बाजरे के मूल्य बढ़ाने के लिए राजस्थान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था|

जिस वजह से उन्हें उस समय भी कुछ दिन तक जयपुर जेल में जाना पड़ा था| वहीं अब एक बार फिर से दिल्ली हिंसा में उन्हें नोटिस दिया गया है, और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है| 

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