फुलेरा दूज: जानिए आखिर इस दिन क्यों होती हैं, बिना मुहूर्त के भी रिकॉर्ड तोड़ शादी!

हिंदू पंचांग के अनुसार, फुलेरा दूज हर साल फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है, और इस दिन मांगलिक कार्यों को करना शुभ होता है।  

प्राचीन पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण फुलेरा दूज के दिन पवित्र होली के त्योहार में भाग लेते हैं और रंगों की जगह फूलों की होली खेलते हैं।

दूज का मुहूर्त और महत्व

17:10- 14 मार्च 2021- द्वितीया तिथि प्रारंभ
18:50- 15 मार्च 2021 – द्वितीया तिथि समाप्त-

हिंदू धर्म में आमतौर पर लोग किसी भी शुभ कार्य के लिए शुभ मुहूर्त का विचार करते हैं। लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दूज के दिन अबूझ मुहूर्त बनता है।  इसलिए इस त्योहार को सबसे महत्वपूर्ण और शुभ दिनों में से एक माना जाता है।

सर्दी का मौसम समाप्त होने के बाद इसे शादियों के सीजन का अंतिम दिन माना जाता है। जिस वजह से इस दिन रिकॉर्ड तोड़ शादियां होती हैं। जिसका मतलब है, कि विवाह, संपत्ति की खरीद इत्यादि सभी प्रकार के शुभ कार्यों को करने के लिए दिन अत्यधिक पवित्र है।

इस तरह मनाते हैं फुलेरा दूज

इस दिन सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान भगवान कृष्ण के साथ रंग-बिरंगे फूलों से होली खेलने का होता है। इस विशेष दिन ब्रज क्षेत्र में  देवता के सम्मान में अनेक भव्य उत्सव होते हैं।

मंदिरों को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है और भगवान कृष्ण की मूर्ति को एक रंगीन मंडप में रखा जाता है। इसके साथ ही एक रंगीन कपड़े का छोटा टुकड़ा भगवान कृष्ण की मूर्ति की कमर पर लगाया जाता है, जिसका सांकेतिक प्रतीक है, कि वह होली खेलने के लिए तैयार हैं।

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