नरेंद्र मोदी स्टेडियम की 5 खास बातें, जिनसे मिलती है इसे अलग पहचान

नरेंद्र मोदी स्टेडियम: गुजरात के अहमदाबाद में दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम वैसे तो 1982 से तैयार है, लेकिन अब इसे नया रूप दिया गया है|

तो चलिए जान लेते हैं, मोटेरा की कुछ अनोखी और दिलचस्प बातें, जो इसे बाकी स्टेडियम से अलग बनाती हैं|

1982 में करीब 100 एकड़ ज़मीन पर बने इस क्रिकेट स्टेडियम का असली नाम सरदार पटेल स्टेडियम है, लेकिन जिस जगह ये स्टेडियम बना है, उस जगह का नाम मोटेरा है. इसलिए स्टेडियम का भी प्रचलित नाम यही हो गया|

दुनिया का सबसे बड़ा स्टेडियम

स्टेडियम के नवीनीकरण का काम 2016 में शुरू हुआ, और सिर्फ 2 साल में नया स्टेडियम तैयार हो गया|

मोटेरा में करीब एक लाख 10 हज़ार दर्शक साथ बैठकर मैच देख सकते हैं| बता दें, कि अब तक ये रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड के नाम था|

इंडोर प्रैक्टिस पिच

यह पूरा स्टेडियम करीब 63 एकड़ में बना है, जिसमे 4 एंट्री पॉइंट हैं| मल्टीपल ड्रेसिंग रूम हैं, और इसके अलावा इंडोर प्रैक्टिस पिच भी है| एक डोरमेट्री भी है, जिसमें एक बार में 40 से 50 एथलीट्स रुक सकते हैं

हाई-पावर LED लाइट्स

आमतौर पर स्टेडियम में फ्लड लाइट्स होती हैं| लेकिन, आपको बता दें ,कि मोटेरा में फ्लड लाइट्स की जगह हाई-पावर LED लाइट्स का इस्तेमाल किया गया है| PIB की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस स्टेडियम में 32 फुटबॉल फील्ड समा सकते हैं, और स्टेडियम को बनाने में इतना लोहा, कंक्रीट लगा है, उतने में 10 एफिल टॉवर बन सकते हैं|

Populous कंपनी ने किया कारनामा

मशहूर आर्किटेक्चर कंपनी Populous  ने  मोटेरा का कॉन्सेप्ट तैयार किया| बता दें, कि ये कंपनी दुनिया में तमाम बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर्स का काम कर चुकी है, इनमें ऑस्ट्रेलिया का मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड और इंग्लैंड का वेंबले स्टेडियम शामिल है|

दुनिया का इकलौता स्टेडियम

आखिर में सबसे रोचक बात यह है कि नरेंद्र मोदी स्टेडियम दुनिया का इकलौता स्टेडियम है, जहां मेन पिच और प्रैक्टिस पिच एक ही मिट्टी से बनाकर तैयार की गई है|

इसके अलावा दावा तो यहां तक है, कि मैच के बीच में बारिश हो गई, तो ड्रेनेज सिस्टम 30 मिनट में ग्राउंड से पानी खींचकर बाहर कर देगा|

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