शिवलिंग पर क्यों चढ़ाया जाता है दूध, क्या हैं जानिए इसके पीछे की वजह!

शिवलिंग पर क्यों चढ़ाया जाता है दूध:  दूध का भगवान शिव की पूजा में विशेष महत्व होता है। क्योंकि दूध को धर्म के दृष्टिकोण से सात्विक माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पर दूध चढ़ाने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। लेकिन अगर आप नहीं जानते कि आखिर शिवलिंग पर क्यों अर्पित किया जाता है। तो चलिए बताते हैं आपको इसके पीछे की कथा!

भगवान शिव का नीला  कंठ

भागवतपुराण और विष्णुपुराण की एक वर्णित कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब विष की उत्पत्ति हुई थी, तो पूरा संसार इसकी चपेट में आ गया था|

जिस कारण सभी देवता भगवान शिव की शरण में आ गए, क्योंकि विष की तीव्रता को सहने की ताकत केवल भगवान शिव के पास थी। शिव ने भी तुरंत बिना किसी भय के विषपान कर लिया। विष की तीव्रता अधिक थी, जिस वजह से भगवान शिव का कंठ नीला हो गया।

विष का प्रभाव शिव और शिव की जटा में विराजमान देवी गंगा पर पड़ने लगा। ऐसे में शिव को शांत करने के जल की शीलता भी काफी कम साबित होने लगी थी।

दूध से विष हुआ कमजोर

इससे निजात पाने के लिए देवताओं ने भगवान शंकर से दूध ग्रहण करने का निवेदन किया। इसके बाद भगवान शिव ने दूध से उनके द्वारा ग्रहण करने की आज्ञा मांगी। जिसे स्वभाव से शीतल दूध ने तत्काल ही स्वीकार कर लिया।

शिव ने दूध को ग्रहण किया जिससे जहर की तीव्रता काफी सीमा तक कम हो गई, पंरतु उनका कंठ हमेशा के लिए नीला हो गया और जिसके बाद से भगवान शिव को नीलकंठ के नाम से जाना जाने लगा।

इसलिए कहा जाता है, कि संकट की घड़ी में अपनी चिंता किए बिना दूध ने शिव और संसार की सहायता के लिए शिव के पेट में जाकर विष की तीव्रता को सहन किया, जिस वजह से भगवान शिव को दूध अत्यधिक प्रिय है।

सांप भी भोलेनाथ को बहुत प्रिय है, क्योंकि सांपों ने विष के प्रभाव को कम करने के लिए विष की तीव्रता को अपने अंदर समाहित कर लिया था| इसलिए ज्यादातर सांप बहुत जहरीले होते हैं।

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