केदारनाथ और बद्रीनाथ की कथा, kedarnath aur badrinath katha hindi me

केदारनाथ और बद्रीनाथ की कथा: केदारनाथ को जहाँ शिव जी का निवास स्थान माना जाता है, तो वहीँ बद्रीनाथ विष्णु जी का आराम करने का स्थान है।

कथा के अनुसार, बद्रीनाथ एक समय पर भगवान शिव और पार्वती का स्थान हुआ करता था। एक दिन शिव और पार्वती भ्रमण के लिए निकले और जब वापस लौटे तो इन्होंने द्वार पर एक नन्हे बच्चे को देखा जो काफी रो रहा था। माता पार्वती का वात्सल्य प्रेम इस शिशु को देखकर जाग उठा|

पार्वती ने बच्चे को दूध पिलाया और उसे फिर  वहीं सुलाकर शिव के साथ में स्नान करने के लिए चली गई। जब ये दोनों वापस लौटे तो पाया कि घर का दरवाजा अंदर से बंद था। दरअसल बालक के रूप में और कोई नहीं खुद भगवान विष्णु थे और उन्होंने बद्रीनाथ को अपना स्थान बनाने के लिए ये सब किया था। दरवाजा ना खुलने की स्थिति में पर शिव और पार्वती ये स्थान छोड़कर केदारनाथ चले गए और केदारनाथ को अपना आराम स्थान बना लिया।

बद्रीनाथ आठवां वैकुंठ

बता दें, कि बद्रीनाथ को सृष्टि का आठवां वैकुंठ भी कहा गया है, जहां भगवान विष्णु 6 माह निद्रा में रहते हैं और 6 माह जागते हैं। यहाँ बदरीनाथ की मूर्ति शालग्रामशिला से बनी हुई है, जो कि चतुर्भुज ध्यानमुद्रा में है।

दूसरी तरफ केदारनाथ को उत्तराखंड के 4 धामों में तीसरा और 12 ज्योतिर्लिंगों में ग्याहरवां स्थान मिला हुआ है, और यह सबसे ऊंचाई पर बना ज्योतिर्लिंग है। कहा जाता है, कि यहां पांडवों को शिवजी ने बेल के रूप में दर्शन दिए थे।

इस जगह पर बना मंदिर 3,581 वर्ग मीटर की ऊंचाई पर है। इस मंदिर को करीब 1 हजार साल पहले आदिगुरु शंकराचार्य ने बनवाया था।

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