हिन्दू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा के दिन की इन पांच घटनाओं का है विशेष महत्त्व

हिन्दू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है| इस दिन पवित्र नदियों से स्नान, दान आदि करने का पुण्य अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक लाभकारी होता है|

चलिए  बात करते हैं, इस दिन को हुई इन पांच घटनाओं के बारे में, जिस वजह से हिन्दू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा का बहुत अधिक महत्त्व है|

भगवान शिव बने त्रिपुरारी

ऐसी मान्यता है, कि इस दिन ही भगवान शिव को त्रिपुरारी का नाम मिला था| कार्तिक पूणिमा को महादेव ने अजेय असुर त्रिपुरासुर का वध किया था| इस राक्षस के मारे जाने से तीनों लोकों में फिर से धर्म की स्थापना हुई थी|

पांडवों के दुःख का निवारण

महाभारत युद्ध में पांडवों के सगे संबंधियों की असमय ही मृत्यु हुई थी, जिनकी आत्मा की शांति को लेकर पांडव बहुत दुखी थे|

उसके बाद भगवान कृष्ण के कहने पर पांडवों ने पितरों की शांति के लिए, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के कृष्ण अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तक गढ़ मुक्तेश्वर में पिंडदान किया था|

भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार

विष्णु पुराण के मुताबिक, भगवान विष्णु ने अपने दस अवतारों में पहला अवतार मत्स्य अवतार इसी दिन धारण किया था|

जिसे धारण कर उन्होंने प्रलय काल के दौरान वेदों की रक्षा की थी| भगवान् का यह अवतार कार्तिक पूर्णिमा के दिन होने के कारण वैष्णव मत में इस पूर्णिमा का विशेष महत्त्व है|

देवी तुलसी की बैकुंठ यात्रा

मान्यताओं के अनुसार, हिन्दू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा के दिन तुलसी का विवाह भगवान विष्णु के शालिग्राम रूप के साथ हुआ| जिसके बाद वे बैकुंठधाम चली गई

 सिख धर्म की स्थापना

हिन्दू धर्म के अलावा सिख धर्म में कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्त्व है| मान्यता है, कि सिख धर्म की स्थापना और इस धर्म में प्रथम गुरु नानक देव जी का जन्म इसी दिन से जुड़े हुए हैं| सिख समुदाय के लोग इस दिन को प्रकाश उत्सव के रूप में मानते हैं|

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