असम का जतिंगा गांव: ऐसा सुसाइड पॉइंट, जहां आकर पक्षी कर लेते हैं खुदकुशी

असम का  जतिंगा  गांव: आजतक आपने  लोगों के सुसाइड पॉइंट के बारे में सुना और देखा होगा, लेकिन आज हम आपको एक ऐसे ही स्थान के बारे में बताने जा रहे हैं जहां आकर पक्षी आत्महत्या कर लेते हैं|

दरअसल, दक्षिणी असम का दिमा हासो जिले में एक रहस्यमयी गांव बसा है,  जो हर साल सितंबर महीने की शुरुआत होते ही यह चर्चाओं में आ जाता है|

आत्महत्या की अनोखी दौड़

यहाँ शाम सात बजे से लेकर रात के 10 बजे के बीच अगर आसमान में धुंध छा जाए, हवा की रफ्तार तेज हो जाए और कहीं से कोई रोशनी कर दे तो पक्षी कीट-पतंगों की तरह बदहवास होकर रोशनी के स्रोत पर गिरने लगते हैं| माना जाता है, कि यहां बाहरी अप्रवासी पक्षी जाने के बाद वापस नहीं आते|

बता दें, कि इस वैली में रात में एंट्री पर प्रतिबंध है| दरअसल, यह गांव असम के बोरैल हिल्स में स्थित है, जहां काफी बरसात होती है और बेहद ऊंचाई पर होने और पहाड़ों से घिरे होने के कारण बादलों और बेहद गहरी धुंध का यहां हर समय जमावड़ा रहता है|

वैज्ञानिकों  का मत

वहीं इस पर वैज्ञानिकों का कहना है, कि गहरी घाटी और तेज बारिश के दौरान जब पक्षी यहां से उड़ने की कोशिश करते हैं, तो वह पूरी तरह से गीले हो चुके होते हैं, प्राकृतिक रूप से ऐसे में उनके उड़ने की क्षमता खत्म हो जाती है|

इसके साथ ही यहां बांस के बेहद घने और कटीले जंगल हैं, ऐसे में गहरी धुंध और अंधेरी रातों के दौरान पक्षी इनसे टकराकर दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं|

वहीं अगर तय समय की बात है, तो आमतौर पर पक्षी शाम के समय अपने घरों को लौटने की कोशिश करते हैं, जिस वजह से इस वक्त दुर्घटनाएं ज्यादा होती हैं|

आपको बता दें, कि ये गांव प्राकृतिक कारणों के चलते नौ महीने बाहरी दुनिया से अलग-थलग रहता है|

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