हिमाचल प्रदेश का मलाणा गांव: जहां बोली जाती है दुनिया की सबसे अनोखी भाषा

हिमाचल प्रदेश का मलाणा गांव:  यह दुनिया अपने अनोखेपन और रहस्यों के चलते पहचानी जाती हैं। हालांकि, हमारे देश में  भी एक ऐसा ही गांव है, जो अपनी अनोखी भाषा के लिए जाना जाता हैं क्योंकि दुनियाभर के विद्वान भी इस भाषा को नहीं समझ सकते।

बता दें, कि हिमाचल प्रदेश की चोटियों के बीच स्थित मलाणा गांव चारों तरफ से गहरी खाइयों और बर्फीले पहाड़ों से घिरा है। बेहद छोटी आबादी वाला ये गांव सैलानियों के बीच खूब मशहूर है।

हालांकि, मलाणा तक पहुंचना बहुत ही मुश्किल है। पहाड़ी पगडंडियों से होते हुए ही यहां तक पहुंचा जा सकता है।

ऐतिहासिक किस्से

इस गांव से जुड़े एक एतिहासिक किस्से के अनुसार, यहां के लोग खुद को यूनान के मशहूर राजा सिकंदर महान का वंशज बताते हैं।

माना जाता है कि जब सिकंदर ने हिंदुस्तान पर हमला किया था, तो उसके कुछ सैनिकों ने मलाणा गांव में ही पनाह ली थी और फिर वो यही के होकर रह गए। हालांकि यह अभी तक पूरी तरह से साबित नहीं हुआ है। इसके साथ सिकंदर के समय की कई चीजें मलाणा गांव में मिली हैं।

यहां लोग कनाशी नाम की भाषा बोलते हैं, जिसकी खास बात ये है, कि ये भाषा मलाणा के अलावा दुनिया में कहीं और नहीं बोली जाती, और ना ही इस भाषा को बाहरी लोगों को सिखाया जाता है।

मलाणा गांव की हशीश

दुनियाभर में यहां की हशीश (चरस) काफी मशहूर है। दरअसल, चरस भांग के पौधे से तैयार किया गया एक मादक पदार्थ है। इसके अलावा इसकी सबसे बड़ी खूबी ये है कि मलाणा के लोग इसे हाथों से रगड़ कर तैयार करते हैं और फिर बाहरी लोगों को बेचते हैं।

यही वजह है कि बहुत कम उम्र में ही गांव के बच्चे ड्रग बेचने के धंधे में उतर जाते हैं। यही वजह है कि मलाणा में बाहरी लोगों को सिर्फ दिन में ही आने की अनुमति है, क्योंकि यहां के सारे गेस्टहाउस रात में बंद हो जाते हैं। यहां के लोगों का मानना है कि उनके सर्वोच्च जमलू देवता ने ऐसा आदेश दिया है।

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