फ्रांस में नई नीति को लेकर एक बार फिर मुस्लिम देशों के निशाने पर राष्ट्रपति मैक्रों

मुस्लिम देशों के निशाने पर राष्ट्रपति मैक्रों ‘चार्टर ऑफ रिपब्लिकन वैल्यूज’ की वजह से आए हैं, जिस पर अब एक नया विवाद छिड़ता नजर आ रहा है|

बता दें,  फ्रांस के राष्ट्रपति ने मुस्लिम समुदाय के लिए ये चार्टर पेश किया है| जिसके मुताबिक, इस्लाम एक धर्म है, और इसे किसी भी तरह के राजनीतिक आंदोलन से नहीं जोड़ा जा सकता है|

चार्टर ऑफ रिपब्लिकन वैल्यूज

इस चार्टर के तहत, फ़्रांस के मुस्लिम संगठनों में किसी भी तरह के विदेशी हस्तक्षेप को बैन किया जाएगा| 

चार्टर को स्वीकार करने के लिए मैक्रो ने फ्रेंच काउंसिल ऑफ द मुस्लिम फेथ (CFCM) को 15 दिनों का टाइम भी दिया है|

रिपोर्ट के मुताबिक, सीएफसीएम ने नेशनल काउंसिल ऑफ इमाम बनाने पर अपनी सहमति दे दी है| जिसके बाद अब नियमों के उल्लंघन पर इमामों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी|

अल अरबिया के अनुसार, राष्ट्रपति मैक्रों ने सीएफसीएम के सदस्यों के साथ हुई  बैठक में कहा, इमामों की नई काउंसिल बनने के बाद ना केवल मुस्लिम समुदाय के धार्मिक नेताओं को परमिट जारी किया जाएगा, अपितु चार्टर का उल्लंघन करने पर उन्हें बर्खास्त भी किया जा सकता है|

इस नए चार्टर के अनुसार, सभी बच्चों को एक आइडेंटिफिकेशन नंबर दिया जाएगा, और सुनिश्चित किया जाएगा कि वो स्कूल जाएं| नियमों को ना मानने वाले अभिभावकों को छह महीने की जेल हो सकती है|

मालूम हो, पिछले महीने फ्रांस में क्लासरूम में पैगंबर मोहम्मद का कार्टून दिखाने पर एक टीचर की हत्या कर दी गई थी|

2 अक्टूबर को दिए गए भाषण में भी मैक्रो ने इस्लामिक कट्टरपंथ से निपटने के लिए योजना बनाने का ऐलान किया था| 

इसके बाद, कई मुस्लिम देशों और मुस्लिम नेताओं ने फ्रांस के सामान का बहिष्कार करने तक की अपील भी की थी|

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